अहोई अष्टमी व्रत 2025: पूजा सामग्री, नियम, व्रत कथा और महत्व –

अहोई अष्टमी व्रत 2025 कब है?

इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर (सोमवार) को मनाया जाएगा। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए अहोई माता की पूजा करती हैं और निर्जला व्रत रखती हैं।https://deshvidesh24.com/https-www-deshvidesh24-com-ahoi-ashtami-vrat-2025-puja-vidhi-samagri-katha/

अहोई अष्टमी पूजा सामग्री (Ahoi Ashtami Puja Samagri List 2025)

अहोई माता की पूजा के लिए निम्न सामग्री की आवश्यकता होती है –

  • अहोई माता की प्रतिमा या फोटो
  • श्रृंगार का सामान – चूड़ी, बिंदी, आलता, चुनरी, सिंदूर
  • करवा, रोली, कलावा, फूल-माला
  • गंगाजल, गाय का घी, दीपक, अक्षत, धूपबत्ती
  • मिट्टी का कलश और चौक के लिए सूखा आटा
  • दूध, चावल, 8 पूड़ी, 8 मालपुए

इन सामग्रियों को साफ-सुथरे स्थान पर ही रखें और पूजा से पहले प्रयोग न करें।

🔔 अहोई अष्टमी व्रत के नियम (Ahoi Ashtami Vrat Niyam)

  1. यह व्रत निर्जला रखा जाता है — अन्न, फल या दूध से बनी चीज़ें नहीं खानी चाहिए।
  2. पूजा के दौरान अहोई माता की तस्वीर स्थापित कर विधिवत आराधना करें।
  3. शाम को तारे देखने के बाद अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।
  4. पूजा के बाद सास को वस्त्र भेंट करें और आशीर्वाद लें।

📖 अहोई अष्टमी व्रत कथा (Ahoi Ashtami Katha in Hindi)

एक नगर में एक साहूकार था, जिसके सात बेटे और सात बहुएं थीं। दीपावली से पहले घर की सफाई हेतु सभी बहुएं और एक ननद मिट्टी लेने खेत गईं। ननद की कुदाल से अनजाने में एक ‘सेही’ (साही) के सात बच्चे मर गए।
क्रोधित सेही ने उसे कोख बंधने का श्राप दिया। बेटी ने अपनी भाभियों से दया मांगी, पर सभी ने इंकार किया, सिवाय सबसे छोटी भाभी के जिसने अपनी कोख बंधवाने की अनुमति दी।
कहते हैं, इसी दिन अहोई माता ने प्रकट होकर उन्हें आशीर्वाद दिया, और तब से यह व्रत संतान की सुरक्षा के लिए किया जाने लगा।

🌕 अहोई अष्टमी का महत्व (Ahoi Ashtami Importance)

अहोई अष्टमी का व्रत मां के मातृत्व प्रेम और त्याग का प्रतीक है। इस दिन की पूजा से अहोई माता प्रसन्न होकर संतान की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि का वरदान देती हैं।
व्रती महिलाएं संकल्प लेकर पूरे दिन व्रत रखती हैं, शाम को पूजा कर तारे देखने के बाद व्रत का समापन करती हैं।

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निष्कर्ष (Conclusion)

अहोई अष्टमी व्रत मातृत्व का पवित्र पर्व है, जो संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सफलता के लिए किया जाता है। श्रद्धा और विधिवत पूजा करने से अहोई माता कृपा करती हैं और परिवार में सुख-शांति का संचार होता है।

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